Showing posts with label देशभक्ति. Show all posts
Showing posts with label देशभक्ति. Show all posts

Saturday, July 7, 2012

युग परिवर्तन की वेला



युग परिवर्तन की वेला

इस युग परिवर्तन की वेला मे हमे भी कुछ करना होगा ।
आलस्य प्रमाद विलास छोड़, अब क्रियाशील बनना होगा । ॥ धृ ॥


परिवर्तन के काल चक्र से कोई नहीं बच पाया है ।
अंगुलीमाल इस कारण ही वाल्मिकी बन पाया है ।
जगद्गुरु जो भारत था, वही पुनः बनना होगा । ॥ १ ॥
आलस्य प्रमाद विलास छोड़, अब क्रियाशील बनना होगा ।


वीर शिवा की अमर कथाऐ जन-जन को बतलानी हैं ।
गुरु गोविंद के शेरों की ताकत हमको दिखलानी है ।
चाणक्य की शिक्षाओ से, फिर चंद्रगुप्त बनना होगा । ॥ २ ॥
आलस्य प्रमाद विलास छोड़, अब क्रियाशील बनना होगा ।


गजनावी सिकंदर ब्रिटिश फ्रांसीसी जो कोई भी आया है ।
आक्रांताओ के आगे हमने मस्तक नहीं झुकया है ।
भारत के गद्दारों को अब इक-इक कर मरना होगा । ॥ ३ ॥
आलस्य प्रमाद विलास छोड़ अब क्रियाशील बनना होगा ।
इस युग परिवर्तन की वेला मे हमे भी कुछ करना होगा ।
आलस्य प्रमाद विलास छोड़, अब क्रियाशील बनना होगा ।

--दीपक भारद्वाज   

Thursday, July 5, 2012


गीत: नई डगर नया सफर कदम मिला के चल

नई डगर नया सफर कदम मिला के चल । नौनिहाल देश के मुस्कुरा के चल ।  ॥ धृ ॥

पर्वतो को लांघते शेर से दहाड़ते । बढ़ चले ये काफिला मुश्किले पछाड़ते ।
हर कदम नई उमंग मे उठा के चल। ॥ १ ॥  नौनिहाल ...

हाथ हाथ में लिए साथ साथ चल दिया । देश पर सदा मिटे देश के लिए जिये ।
एकता का गीत आज गुनगुनाते चल ॥ २ ॥


अब विकास की किरण खोल रही है नयन । मेघ सरस झूमते हो रही धरा मगन ।
खेत खेत मे किसान को जगा के चल ॥ ३ ॥ 

---साभार बाल पदावली