Tuesday, June 26, 2012

कातर करुण पुकार


कातर करुण पुकार



त्रेता युग मे राम ने, दिया दशानन मार ।

द्वापर मे फिर आपने, लिया कृष्ण अवतार ।

लिया कृष्ण अवतार, गीता हमको बतलाई ।

रचा महा एक युद्ध, भाई से लड़ गया भाई ।

आज पुनः इस धरा पर, अवतारो जगदीश ।

त्राण दिलाओ दुर्बुद्धि से, धरो क्रांति का बीज ।

धरो क्रांति का बीज, विचार परिवर्तन लाओ ।

दुर्बुद्धि है दैत्य, मार तुम इसे गिराओ ।

माँ भारती की पुकार



जाग उठो कमर कसो सब भगिनी और भ्राता।

हम सबको पुकार रही है अपनी भारत माता।



अभी समय है कूच करो मस्तक करके ऊंचा ।

अखिल विश्व मैं कोई नहीं है आर्यव्रत सा दूजा ।  



कातर करुण कृंदन का स्वर पहचानो ऐ वीर ।

भारत माँ का स्वाभिमान मत होने दो तुम जीर्ण ।



करबद्ध हो प्रतिज्ञा लो अपनी माँ की खातिर ।

पाहुचाओ इसे शीर्ष पर पुनः करो प्रस्थापित ।