कवि
इस नितांत नीरव वातावरण मे, एक उम्मीद बंधा देते हैं कवि
सोती हुई इस जनता को, फिर से जगा देते है कविअंधियारी एक मावस मे, राह दिखा देते हैं कवि
कलम के इन हथियारों से, सरकार हिला देते हैं कवि
कवियों के इन बलिदानों को, तुम व्यर्थ न यूं होने देना,
जो चेतना संचार किया, उसको तुम मत रुकने देना
महाकाल की बलिवेदी, तुमसे बलिदान ही मांगेगी
अपना शीश चढ़ा कर तुम, माँ को गर्वित होने देना
कवियों के इन बलिदानों को, तुम व्यर्थ न यूं होने देना