युग परिवर्तन की वेला
इस युग परिवर्तन की वेला मे हमे भी कुछ करना होगा ।
आलस्य प्रमाद विलास छोड़, अब क्रियाशील बनना होगा । ॥ धृ ॥
परिवर्तन के काल चक्र से कोई नहीं बच पाया है ।
अंगुलीमाल इस कारण ही वाल्मिकी बन पाया है । जगद्गुरु जो भारत था, वही पुनः बनना होगा । ॥ १ ॥
आलस्य प्रमाद विलास छोड़, अब क्रियाशील बनना होगा ।
वीर शिवा की अमर कथाऐ जन-जन को बतलानी हैं ।
गुरु गोविंद के शेरों की ताकत हमको दिखलानी है । चाणक्य की शिक्षाओ से, फिर चंद्रगुप्त बनना होगा । ॥ २ ॥
आलस्य प्रमाद विलास छोड़, अब क्रियाशील बनना होगा ।
गजनावी सिकंदर ब्रिटिश फ्रांसीसी जो कोई भी आया है ।
आक्रांताओ के आगे हमने मस्तक नहीं झुकया है । भारत के गद्दारों को अब इक-इक कर मरना होगा । ॥ ३ ॥
आलस्य प्रमाद विलास छोड़ अब क्रियाशील बनना होगा ।
इस युग परिवर्तन की वेला मे हमे भी कुछ करना होगा ।
आलस्य प्रमाद विलास छोड़, अब क्रियाशील बनना होगा ।
--दीपक भारद्वाज
Nice one!
ReplyDeleteबहुत बढ़िया शिक्षाप्रद गीत...
ReplyDeleteअपनी कलम से ऐसे ही धारदार रचनाओं का स्रजन करते रहिए ...
Dhanyawad
Deletegood one
ReplyDeletehttp://vendemataram.blogspot.in/2015/07/blog-post.html
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